Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full !exclusive! Direct

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इन पाँचों पर यदि भावपूर्वक चैत्यवंदन किया जाए, तो यात्रा का फल अक्षय हो जाता है।

सभी तीर्थों के राजा श्री शत्रुंजय गिरिराज और माता मरुदेवी के पुत्र भगवान आदिनाथ को देखकर मेरा मन आनंद से भर जाता है। इस विमलाचल की चोटी पर प्रभु ऋषभदेव ९९ बार समवसरे (पधारे) और उनके पदचिन्हों पर चलते हुए करोड़ों मुनिराज कर्मों का नाश कर मोक्ष गए। यहाँ का मुख्य चौमुख जिनालय और विमलाचल की चोटियाँ सभी भव्य जीवों के मन को मोह लेती हैं। हे प्रभु! मुझे अपना सेवक जानकर अपने चरणों में स्थान दें।

यदि आप इस साधना को और गहरा करना चाहते हैं, तो मुझे बताएं:

पालीताना का यह 5 चैत्यवंदन पाठ केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि भावयात्रा का माध्यम है। यदि आप पालीताना की यात्रा पर जा रहे हैं, तो मुख्य मंदिर की टूंक में और रायण पगला के पास बैठकर इन पाठों का गान अवश्य करें। यदि आप घर पर भी शत्रुंजय गिरिराज का चित्र सामने रखकर इन 5 चैत्यवंदन को पूरे भाव से पढ़ते हैं, तो आपको घर बैठे ही इस महातीर्थ की यात्रा का दिव्य फल प्राप्त होता है। palitana 5 chaityavandan in hindi full

क्या आप पालीताना की की यात्रा विधि जानना चाहते हैं?

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श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे;भाव धरी ने जे चढे, तेने भव पार उतारे।अनंत सिद्धनो आहे ठाम, सकल तीर्थनो राय;पूर्व नवाणु ऋषभदेव, ज्यां ठाविया प्रभु पाय। This link or copies made by others cannot be deleted

इन पाँच स्थानों का चैत्यवंदन करके तीर्थयात्री न केवल अपने पापों का नाश करते हैं, बल्कि वे के पथ पर भी अग्रसर होते हैं। यह यात्रा उन्हें सांसारिक बंधनों से मुक्ति और आत्मा के शाश्वत स्वरूप को पहचानने का अवसर प्रदान करती है।

2. शांतिनाथ भगवान (Shanthi Nath Bhagwan) - दूसरी चैत्यवंदन

पालीताणा के ५ चैत्यवंदन हैं: Try again later

गिरिराज की यात्रा में दूसरा चैत्यवंदन का करना होता है। यह जिनालय विक्रम संवत 1860 में वैशाख शुद पंचमी के दिन दमण के शेठ श्री हीराचंद रायकरण दमन वालों द्वारा बनवाया गया था।

हे भगवन्! उत्तम स्थान (मोक्षस्थान) में स्थित, अंतिम शरीरधारी जिनेंद्र भगवान को मैं वंदन करता हूँ। हे साधो! आप मुझ पर प्रसन्न हों।

नीचे इन पाँच चैत्यवंदनों का संपूर्ण विवरण और उनकी स्तुति की प्रारंभिक पंक्तियाँ दी गई हैं: