प्रमाण पत्र अधिकारी को वसूली के लिए व्यापक अधिकार प्राप्त होते हैं, जैसे:
बकायेदार नोटिस मिलने के बाद आपत्ति दर्ज कर सकता है।
बिहार और उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 (Bihar and Orissa Public Demands Recovery Act, 1914) एक महत्वपूर्ण राजस्व कानून है जो सरकारी देयों और अन्य सार्वजनिक मांगों की त्वरित वसूली के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है। यह अधिनियम आज भी बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में प्रभावी रूप से लागू है।
🏛️ Major Provisions (प्रमुख प्रावधान) Description in Hindi Summary of Action प्रमाणपत्र दाखिल करना
बिहार सरकार के 'राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग' (Department of Revenue and Land Reforms) या 'विधि विभाग' (Law Department) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
'लोक मांग' (Public Demand) क्या है?
इस अधिनियम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सामान्य दीवानी वादों की लंबी प्रक्रिया से बचते हुए, एक "प्रमाणपत्र" (Certificate) के आधार पर वसूली करने की अनुमति देता है। इस प्रक्रिया में "" (Certificate Officer) नामक एक अधिकारी को प्रमुख भूमिका निभानी होती है, जो आमतौर पर जिला कलेक्टर या उप-विभागीय अधिकारी होता है।
संबंधित विभाग या प्राधिकारी वसूली के लिए एक अधियाचना दायर करता है।
ओडिशा सरकार के लॉ डिपार्टमेंट (Law Department, Odisha) की वेबसाइट पर भी इस एक्ट का मूल और संशोधित रूप उपलब्ध रहता है।
यह एक्ट एक प्रक्रिया प्रदान करता है, जिसके तहत बिना सामान्य अदालतों में लंबी कार्यवाही किए, सरकारी बकाया वसूला जा सकता है। इस एक्ट के तहत:
सरकारी और अर्ध-सरकारी बकाये की वसूली में होने वाली देरी को कम करना।
चूंकि यह एक पुराना और तकनीकी कानून है, इसलिए इसका आधिकारिक हिंदी अनुवाद (Hindi PDF) प्राप्त करने के लिए आपको सही सरकारी स्रोतों का उपयोग करना चाहिए। इसे डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए तरीकों का पालन करें:
सर्टिफिकेट ऑफिसर बकायेदार (Certificate Debtor) को धारा 7 के तहत नोटिस जारी करता है। इसमें बकाये की राशि चुकाने या आपत्ति दर्ज करने का समय दिया जाता है।
यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है और इसे कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। सटीक कानूनी जानकारी के लिए कृपया मूल अधिनियम का संदर्भ लें।
जब कोई व्यक्ति सरकार को कोई धनराशि (जैसे भू-राजस्व, कर आदि) चुकाने में चूक करता है, तो संबंधित अधिकारी उसे देय राशि का 'प्रमाण पत्र' (Certificate) जारी करता है। इस प्रमाण पत्र में बकाया राशि और व्याज का विवरण होता है।